अँधेरे बहुते बढ़ गये है आज
तुम उजालों से दो भर
यू तो चिराग उमीदों काअब भी है रोशन
पर आज तुम रोशनी दो कर
चमकते रास्तों पर चलते है सब साथ
पर यकीं हैं तुम पर
कि थाम के हाथ तेरा
स्याह राहों से जायेगे गुज़र
औऱ जब उजाले जगमगाएँगे भीतर
तो सुस्ताने लगेंगी मुश्किलें
खुशनुमा हो जायेगी ज़िंदगी
औऱ आसान हो.कर जायगी बसर