Friday, December 12, 2014

रफ़्तार ............

पल पल करके ज़िन्दगी यूँ ही बीत जायेगी.....
आज तो बहुत तेज़ रफ़्तार से भाग रही है पर....
कल तेरी बहुत याद आयेगी।
जब बारिश सूखी मिटटी को भिगोएगी...
तब मन के आँगन की दोपहरी में..
तेरी याद की बदली छायेगी।

सूखे सपने

दिल में छुपाए थे दर्द बहुत,
तेरे आने से खुलने लगे है।
या अब और नजदीक आएंगे हम,
या बहुत दूर चले जायेंगे...
नमकीन से तैरते अश्क आँखों में,
सूख गए थे,सपनो के साथ,
बादल अहसास के नए से घिर आए,
तो अब वो अश्क घुलने लगें है।
या अब ये झेल जायेंगे सब,
या हमको रुला जायेंगे।

मेरी भागती ज़िन्दगी

फ़ुरसत नहीँ दे पाया मुझे मेरा जीवन,
प्यार करने के लिए भी..........
हाँफ ते भागते रहे दूर तक सदा......
.रुक सके न मगर ,आह भरने के लिए भी......
तेरी ओट की छाया थी फिर भी,
सांस टूटती रही कई बार फिर भी,
इज़ाज़त मिली नही  कभी,
मरने के लिए भी.....