Friday, December 12, 2014

सूखे सपने

दिल में छुपाए थे दर्द बहुत,
तेरे आने से खुलने लगे है।
या अब और नजदीक आएंगे हम,
या बहुत दूर चले जायेंगे...
नमकीन से तैरते अश्क आँखों में,
सूख गए थे,सपनो के साथ,
बादल अहसास के नए से घिर आए,
तो अब वो अश्क घुलने लगें है।
या अब ये झेल जायेंगे सब,
या हमको रुला जायेंगे।

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