दिल में छुपाए थे दर्द बहुत,
तेरे आने से खुलने लगे है।
या अब और नजदीक आएंगे हम,
या बहुत दूर चले जायेंगे...
नमकीन से तैरते अश्क आँखों में,
सूख गए थे,सपनो के साथ,
बादल अहसास के नए से घिर आए,
तो अब वो अश्क घुलने लगें है।
या अब ये झेल जायेंगे सब,
या हमको रुला जायेंगे।
तेरे आने से खुलने लगे है।
या अब और नजदीक आएंगे हम,
या बहुत दूर चले जायेंगे...
नमकीन से तैरते अश्क आँखों में,
सूख गए थे,सपनो के साथ,
बादल अहसास के नए से घिर आए,
तो अब वो अश्क घुलने लगें है।
या अब ये झेल जायेंगे सब,
या हमको रुला जायेंगे।
nice line......
ReplyDeleteThanks
DeleteGr8 poem
ReplyDeleteGr8 poem
ReplyDeletethanks
Deletebows...
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