Saturday, April 9, 2016

Shyam

जब  तुम  हो  के  भी  नहीँ  थे
और नहीँ  हो  कर  भी सभी जगह   थे
आज तुम  नहीँ  हो पर
हर  वक़्त मेरे  साथ तुम्हारी शरारती सी  आँखें

मेरे  पीछे  पडी  रहती  है

सुबह शाम बस श्याम  श्याम
कहते गुजरते  है  दिन
शायद  समय भुला देगा इन्हे  भी पर
क्यू थमते नही ये...आँसू
मन करती है बुला के देखूं
तुम लौट आयोगे शायद
फ़िर  सोचा छोडो
तुमे भी मेरी याद आती होगी शायद
तुम  कह के गये थे..मैं जब तक न बुलाऊ
तुम खड़ी रहना दहलीज पर
वही मैं रहुगी इन्तेजार मे
मुझे लगता है कि तुम लौटोगे शायद