Friday, September 9, 2016

बेपरवाह

कुछ  बचा नही इस इश्क मे
पर किये जा रहे हैं
सूख चुके सब अश्क
पर रोये जा रहे  हैं...
एक ज़माने मे तुझे याद करके
खोयी नींदे
कि.अब जाग कर भी
जानबूझ के सोये जा रहे हैं...
परवाह तो तुम्हे पहले भी न  थी
पर आजकल वो हद लांघ के
बेपरवाह हुये जा रहे हैं...

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