एक आँसू आँख के कोर से टपका ,
गाल को गीला करता हुया ,
अपनी नियति से अनजान ..
क्या गिरेगा किसी हथेली पर ..
या जायगा सूख किसी तकिए पर ..
अविरल बहेगा या ना थमने के वास्ते ..
या ओठों पर रुक कर .
चखायेगा नमकीनया .
ख़ुद में समेटे बेचैनिया ..
या यादों के पोटलियाँ .
भरी होता हुया हर क्षण ..
आख़िर तोड़ गया बांध संयम का ..
रोष थी? या मजबूरियां? उसकी जननी
पर आज़ वो लावारिस सा ,
कभी मोती सा था कीमती ,
आज़ स्याह है घुले काजल सा ,
घुप्प रात मे कहीँ खो गया ..
किसी ने देखा ना जाना ना पुचकारा ,
आख़िर थक कर सो गया ....
Friday, October 26, 2018
आंसू की नियति
Saturday, October 6, 2018
Golden rules fir instant happiness
Rules to be instantly happy( it works)😎
Put gud peppy music ..
F..k the world..f..k what ppl think..
Dance...
Count your blessings..
Think of ur mom or dad..evn if they nt with u..
Think of your childhood
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