जो मांग के मिले वो इनायत नही चाहिये जो दिल से निकले वो शिकायत भी है क़बूल
वो झूठ से रंगी सुर्ख मोहब्बत नही चाहिए सच की स्याह में डूबी तेरी हिक़ारत भी है क़बूल
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