Thursday, April 30, 2020

उन्हीं से

हम मोहब्बत कर चुके है
कई बार उन्ही से

न मिलना है मुकम्मल
ये बात भी तय है
बिछड़े फिर मिले
उम्मीद फिर बंधी 
हर बार उन्ही से

सोचा था न सोचेगे
इश्क़ की सोच को
यकीं होता नहीं अब
फिर भी
वादों की वहीं बात
चल चुकी है 
सौ बार उन्ही से

हम मोहब्बत कर चुके है
कई बार उन्ही से

lockdown 2020

न ही कुछ लिखा
न कुछ पढ़ा है
न ही कुछ है समझ पा रहे
इन दिनों

यूं अचानक ही
बदल गया है सब 
बाहर भी
भीतर भी
इन दिनों

नींद काफिर थी
उन दिनों भी 
पर रात और दिन 
पलट गए है
इन दिनों

हालांकि
मौत से डर
न पहले था
न कभी और
दिल कुछ ज्यादा ही
सहम गया है
इन दिनों