Thursday, October 2, 2025

चट्टान

मेरी भावनाएं आहत हैँ
तुम्हारी बेरुखी से 
टकरा कर टूट जाती हैँ
जैसे कोई लहरें
चट्टान को गले लगाने के बाद बिखर जाती हो


क्यूँ तुमको कोई दरकार नहीं
आता मुझे पर प्यार नहीं
क्यूँ नहीं बरस जाते तुम
क्यूँ नहीं बरस जाते तुम
जैसे सावन की छीटों से
बगिया निखर जाती हो..
By the way