तुम्हारी बेरुखी से
टकरा कर टूट जाती हैँ
जैसे कोई लहरें
चट्टान को गले लगाने के बाद बिखर जाती हो
क्यूँ तुमको कोई दरकार नहीं
आता मुझे पर प्यार नहीं
क्यूँ नहीं बरस जाते तुम
क्यूँ नहीं बरस जाते तुम
जैसे सावन की छीटों से
बगिया निखर जाती हो..
By the way
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