तू भूल जायेगा मुझको कुछ अंदाज़ तो था मुझको शायद इसलिये एक कतरा भी नही गिरने दिया आँखो से हमने
इतनी खामोशी से बिखरा सब कुछ आवाज़ भी.हुयी होगी शायद पर किसीको आहट भी नही होने दी हमने
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