Monday, July 31, 2017

सोने सा मन

कौन उतावला हुया जा रहा तेरी खातिर ..
ओ सोने से मन .
सब देखे चकाचौंध  पीतल  की ..
कौन धनी है इतना जो तुझको पा ले ..
भाव तेरा है बस सौ ग्राम अपनापन ..
चाहत है सबको चमक दमक की ..
पर नही है जेबों मे प्यार की.कौड़ी ..
देखेंगे सब कुछ दिन का  यौवन ..
जिसके पीछे दुनिया है दौड़ी ..
सबको अपना मान तू बैठे ..
हर दिन छला है तूने खुद को ..
तेरा तो भगवान है मालिक ..
मत कहना कुछ भी अब मुझ को ...
आज लगी लाखो की महफिल ..
तेरे इर्द गिर्द
कल  फ़िर  रह जायगा तू और खालीपन .

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