तेरे और मेरे बीच
बस इतनी कड़ी है
दिन की शुरुवात मे
रात के अंत मे
और इनके बीच
कुछ और यादें जुड़ी है
लगभग ख़तम सा लगता ये रिश्ता
फ़िर भी कुछ है जो जोड़े है हमको
तेरा पता नही
शायद मेरी आशा अपनी जिद
पे अड़ी है
आ जाती है मेरी साँझ
चौखट पर तेरी
नही तो न जाने कितनी दफा
झटक कर आगे बड़ी है
मालूम है तेरा लौट कर आना है मुश्किल
पर सच तो ये है कि उम्मीद पर
दुनिया खड़ी है .
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