Tuesday, August 1, 2017

तेरे और मेरे बीच

तेरे  और  मेरे बीच
बस इतनी कड़ी है
दिन की शुरुवात मे
रात के अंत मे
और  इनके बीच
कुछ और यादें जुड़ी है
लगभग ख़तम सा लगता ये रिश्ता
फ़िर भी कुछ है जो जोड़े है हमको
तेरा पता नही
शायद मेरी आशा अपनी जिद
पे अड़ी है
आ जाती है मेरी साँझ
चौखट पर तेरी
नही तो न जाने कितनी दफा
झटक कर आगे बड़ी है
मालूम है तेरा लौट कर आना है मुश्किल
पर सच तो ये है कि उम्मीद पर
दुनिया खड़ी है .

Copyrights @Babita Yadav.All rights reserved 2017

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