Sunday, February 11, 2018

एक शख्स को सदा

एक शक्स को सदा हँसते देखा
खुद को उसके जैसा बदलते देखा
एक घने पेड़ की छाया सा है वो
सोचा कि सुस्ता ले जरा छाया मे जरा
पर खुद को और भी भटकते देखा

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