Thursday, February 8, 2018

समंदर है मुझ में

कभी कभी लगता है समंदर है मुझ में
सवालों के अथाह बवंडर है मुझ में
प्यास भी मुझी में ..
अहसास भी मुझी में ..
किसी आलीशान इमारत के खंडहर है मुझ में
कभी जवाब मिल जाता है एक तो ..
सवाल बदल जाता है फिर से ..
कुछ ऐसा है जो हासिल नही होता
बाहर ढूंढ़े जाती हूँ मैं जो
शायद कहीँ  अँदर है मुझ में
Copyrights @Babita Yadav.All rights reserved 2018

No comments:

Post a Comment