Friday, March 30, 2018

नहीं चाहिये प्यार तुम्हारा

छोड़ो नहीं चाहिये  तुम्हारा प्यार
होगा तुम्हारे पास  तो दोगे
ऐसे तो ..
अपने ही दिल में भरा है अपार

सालों से सूखी मिट्टी पर
बरसी नहीं दो बूंद
अब तो तरस गये इतना कि
ऐसे ही आँखें लेंगे मूंद

न जाने तुम पत्थर की दिवार के जैसे
जिंदा हो या हो बुत
बंद कमरे सा दिल तुम्हारा
न हवा  न धूप
आये  कोई भी रुत

छोड़ो नहीं चाहिये  तुम्हारा प्यार
होगा तुम्हारे पास  तो दोगे
ऐसे तो ..
अपने ही दिल में भरा है अपार

नहीं जलेगी बुझी हुई राख
लाखों मारे फूंक  थक गये हम
अब आंखों में भी है  चुभती
अरमानों की खाख

तुम हो न  हो
कोई नहीं है अंतर
विस्मित होती हूँ  इतना कि
इतने में मिल जाता ईश्वर
पढ़े करोड़ो मंतर

छोड़ो नहीं चाहिये  तुम्हारा प्यार
होगा तुम्हारे पास  तो दोगे
ऐसे तो ..
अपने ही दिल में भरा है अपार

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