Friday, September 28, 2018

अश्क

मेरे अश्क तेरे अश्क से ही नमकीन क्यूँ हैं
तू किसी और के लिए ही सही
पर इस कदर ग़मगीन क्यूँ हैं
मुझे तेरे इश्क कि अब चाहत नही
तू इश्क समझता हैं ..ये ही हैं बहुत
पर तू मूझे समझे कभी
ये ग़लत सा यकीन क्यूँ हैं
तुझ पर मरते ही तो.है
किसीको मारा तो नही
फ़िर मेरा जुर्म इतना संगीन क्यूँ है

Sunday, September 2, 2018

तोड़ना आसान नहि todna asaa nhi

रोके कभी गहन धूप, कभी आँधियाँ ,
बिछड़े राह में कई कारंवा ,
आदतन पैर में हैं छाले पड़े पर ,
जो मैं हार जायूं ये वो थकान नही ..

घाव शब्द के, कभी परिहास के,
ठोकरें कभी, रुस्वाइयाँ
कभी बेरुखी के अहसास भी,
कोशिशे जारी रखो ,
कि मुझे तोड़ना आसान नही ..

हर कोशिश पर तेरी ,
मेरी हिम्मत भारी पड़ी  ,
यूं साथ की थी चाहते,
पर हर बात पर तेरी आँखे फिरी 
जो तू नही तों कोई शिकवा नही ,
कि तू चीज हैं बहुत बड़ी पर कोई  भगवान नही ..

बढ़ते रहना,  हैं मेरी फ़ितरत
और साबित कुछ करना नही,
बस कर सकूँ फ़क्र ख़ुद पे ,
मुझे बनना तुझ सा महान नही ...

हैं जमीं मेरे पाँव तले,
मुझे रस्ते ख़ुद ब ख़ुद मिले ,
हैं यक़ीन ख़ुद पर इस कदर ,
क़दम बढ़े मंजिल तलक ,
रास्ते मेरे साथ हो ,
कि चाहिये मुझे  आसमान नही ...
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