रोके कभी गहन धूप, कभी आँधियाँ ,
बिछड़े राह में कई कारंवा ,
आदतन पैर में हैं छाले पड़े पर ,
जो मैं हार जायूं ये वो थकान नही ..
घाव शब्द के, कभी परिहास के,
ठोकरें कभी, रुस्वाइयाँ
कभी बेरुखी के अहसास भी,
कोशिशे जारी रखो ,
कि मुझे तोड़ना आसान नही ..
हर कोशिश पर तेरी ,
मेरी हिम्मत भारी पड़ी ,
यूं साथ की थी चाहते,
पर हर बात पर तेरी आँखे फिरी
जो तू नही तों कोई शिकवा नही ,
कि तू चीज हैं बहुत बड़ी पर कोई भगवान नही ..
बढ़ते रहना, हैं मेरी फ़ितरत
और साबित कुछ करना नही,
बस कर सकूँ फ़क्र ख़ुद पे ,
मुझे बनना तुझ सा महान नही ...
हैं जमीं मेरे पाँव तले,
मुझे रस्ते ख़ुद ब ख़ुद मिले ,
हैं यक़ीन ख़ुद पर इस कदर ,
क़दम बढ़े मंजिल तलक ,
रास्ते मेरे साथ हो ,
कि चाहिये मुझे आसमान नही ...
Copyrights reserved @Babita Yadav 2018
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