Saturday, May 9, 2020

एक है बंदी kalahouse

 एक है बंदी,
बहुत ज़िद्दी,मदमस्त
कठिन दिखती है
पर शायद , छलती है
लोगो को,खुद को भी।

रोने को आए 
तो दूसरों के दुख पर रोए
नहीं तो, इतनी निष्ठुर कि
तौबा होए

मांगना गवारा नहीं
लेना कुछ भी है नमंजूर
अजीब सनक है
नहीं उसे भनक है
इन आंखो के सपने छोटे से
कभी पास लगे
कभी कितनी दूर

एक है बंदी
बहुत अखड़,बिंदास
बदमिज़ाज लगती है
पर शायद छलती है
लोगो को, खुद को भी।

poetry

I don't know what decides a good piece of poetry .like any other art it's an expression solely of the creator .the creator ,no doubt descends his or her energy or the current state of mind into something ..he owns it.if other person who feel related to the piece of art or ever gone through such innate state of mind even once in his or her life he would definitely recognise the energy it contains.poetry ,hence is a portal,to connect ,to share,to communicate,to express hidden feelings.For some it also may be the only companion .
I feel if it is done to raise to fame , or to get recognised,the very essence dies.like a plastic flower which howsoever look beautiful can't emit fragnance.

Friday, May 8, 2020

khud ko tarsane

खुद को तरसाने में
अलग ही मज़ा है।
मन करता है जला लूं 
अश्कों से आंखे
दिल को भी तार तार कर लूं
भूख ओढ़ ,सो जाऊं छुप कर
प्यास से ,अपने होंठ सी लूं

कहते है ,सोना निखरता है तप कर
देखूं क्या मैं सोना हो पायूंगा
या अपने खोखलेपन मे यूं ही
जल कर राख हो जाऊंगा।

धूप में लेटूं,या ओले की थपेड़े झेलूं
मजदूर सा पत्थर से खेलूं
चुभन,तपिश, टीस
सब ले लूं
विष पी सारा शिव हूं लूं
और फिर हंस कर बोलूं,
खुद को तरसाने में
अलग ही मजा है।

Thursday, May 7, 2020

एहसास भरा करते थे

डूब रही है कश्ती मेरी
शंका के गहन तूफान है
कहां तो शब्दों की पतवार से
हम तेज भंवर तरा करते थे।

मौन हूं , पर शांत नहीं
ख़ामोश हूं पर गरज रही
क्या वहीं ज़हन है ये जहां कभी 
लफ्ज़ हर पल शोर करा करते थे।

खाली दिन,खाली राते
खाली है मन की गगरी
शायद फिर से बहेगी
सूनी नगरी
पहले जैसे इसमें
कई एहसास भरा करते थे।



Wednesday, May 6, 2020

ये प्यार भी क्या बला है

ये प्यार भी क्या बला है
जब नहीं चाहिए तो मिलता है
जब चाहिए तब नहीं

अब जब तौंबा करली 
 इस बला से
सब लौट आए 
दामन भरने

अहत करली इस
 मोहबत से
जैसे शराब से करली 
किसी शक्स ने।


Saturday, May 2, 2020

khaak baat hui1hui14feb

सुना है ग़ज़ब का लिखते हो तुम
लफ्जो में माहिर दिखते हो तुम
आज दर्द का माहौल है
 घर लोगो के जल रहे
दोस्त भी दुश्मनों से खल रहे
और जो न बन सके आवाज़ तुम आवाम की
तो  खाक बात हुई।

है मालूम कि सबको अज़ीज़ हो
मोहब्बत के मारो के ख़ुदा हो
लोग वाह वाही है वारते
एक और एक और है पुकारते
कई शक्स और हसीनाएं भी
शायद तुम पर फ़िदा हो
जो लिख न पाए बात किसी काम की
तो  खाक बात  हुई।

ता उम्र लिखते रहे 
मोहब्बत के अफसाने
गूंजते रहते है शायरी से
महफ़िल और महखाने
पर और भी दर्द है मोहब्त के सिवा
जो न बन सके किसी की दवा
कोई ग़ज़ल न कह पाए आराम की
तो खाक बात हुई।