Saturday, May 9, 2020

एक है बंदी kalahouse

 एक है बंदी,
बहुत ज़िद्दी,मदमस्त
कठिन दिखती है
पर शायद , छलती है
लोगो को,खुद को भी।

रोने को आए 
तो दूसरों के दुख पर रोए
नहीं तो, इतनी निष्ठुर कि
तौबा होए

मांगना गवारा नहीं
लेना कुछ भी है नमंजूर
अजीब सनक है
नहीं उसे भनक है
इन आंखो के सपने छोटे से
कभी पास लगे
कभी कितनी दूर

एक है बंदी
बहुत अखड़,बिंदास
बदमिज़ाज लगती है
पर शायद छलती है
लोगो को, खुद को भी।

No comments:

Post a Comment