दिखा कर अपनी कविताएं
कौन सी है सबसे उम्दा
हमने भी रख दी एक जज़्बाती कविता पे उंगली
वो कहने लगी आखिर क्यों ख़ास है ये
हमने कहा
जो तुम चाहते छिपा रही हो
शब्दों में लिपटी चाह है ये।
जो रोज़ घुट रही हो
उस कसक की आह हैं ये
कतराती , कभी कुरेदती
सवालों भरी निगाह है ये
सुनने वाले की दिल में उतर जाए
महफ़िल सजाने वाली वाह है ये
और शायद तेरे को समझ पाऊं
तेरे तक पहुंचने की राह हैं ये
वो मुस्करा कर नज़ारे गढा कर बोली
छुपे रस्तुम हो तुम भी कम नहीं
ये जो कर रहा है शब्द की जादूगरी
शायर कोई कमाल का
निकाल तो ,कहां हैं ये।।।
निकाल तो ,कहां हैं ये