Tuesday, June 23, 2020

कहां है वोopen mic

उसने बड़े एहतियात से पूछा हमसे
दिखा कर अपनी कविताएं 
कौन सी है सबसे उम्दा
हमने भी रख दी एक जज़्बाती कविता पे उंगली
वो कहने लगी आखिर क्यों ख़ास है ये
हमने कहा
जो तुम चाहते छिपा रही हो 
शब्दों में लिपटी चाह है ये।
जो रोज़ घुट रही हो
उस कसक की आह हैं ये
कतराती , कभी कुरेदती
सवालों भरी निगाह है ये
सुनने वाले की दिल में उतर जाए
महफ़िल सजाने वाली वाह है ये
और शायद तेरे को समझ पाऊं
तेरे तक पहुंचने की राह हैं ये

वो मुस्करा कर नज़ारे गढा कर बोली

छुपे रस्तुम हो तुम भी कम नहीं
ये जो कर रहा है शब्द की जादूगरी
शायर कोई कमाल का
निकाल तो ,कहां हैं ये।।।
निकाल तो ,कहां हैं ये



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