चूंकि नींद है कम
एक है खुशी,और
चार है गम
खुली आंखों से ही
दुनिया सजाए कोई।
चलो, ख़्वाब नया देखे कोई
शब्द ही है जिनके जादू से
जुड़े है हम
वक़्त भी हो रहा है कम
तमाम दूरियां है दरमियान यूं
आयो, नजदीकियों का पुल बनाए कोई।
चलो, ख़्वाब नया देखे कोई।
याद है वो गहराइयां,
जज़्बात की लड़ाईयां,
सोई हुई ,खोई हुई,
अनकही रुसवाईयां,
जिस्म और सोच से परे,
अछूते एहसाह जगाए कोई।
चलो, ख़्वाब नया देखे कोई।
वक़्त और हालात तो,
हो अपने गिरफ्त में,
एक दूसरे की रूह से
इतनी बार हो सामना
आग इस तलाश की
अब बुझाए कोई।
चलो, ख़्वाब नया देखे कोई।
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