कहते है आज मोहबत का दिन है
लोग बाग़ मिलेंगें मोह्बत जताते हुए
और हम
और हम
किसी महफ़िल मे
ना मज़ूद् इश्क़ कि
शायरी सुनात हुए।
कहते है आज मोहबत का दिन है
कहते है आज मोहबत का दिन है
लोग बाग़ मिलेंगें मोह्बत जताते हुए
और हम
और हम
मिलेंगे कहीं
खुद को असल मोहबत का
फलसफा समझाते हुए।
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