Sunday, March 28, 2021

होली

था हाथ मे उसके रंग प्यार का
वो स्याह रंग उड़ेल गया..।

वो मन की चौपड़ बिछाये बैठी रही
वो निर्मोही तन से खेल गया।

अब कासे डर पीर का
जब पीर बिछोह का
मन झेल गया।

Thursday, March 11, 2021

गांव

पक्की महुया से अटी हुई 
वह पगडंडी आज भी
याद है मुझे
थाम कर हाथ तेरा बाबा
साथ थी चली खेत खलिहानो में। 

ढेरों बातें,चिलबिल का पेड़
पोखर के ठंडे पानी मे डूबे रहना
चरमर खटिया पर फिर
थक कर सो जाना
मीठे सपने बांध सरहानों मे। 

कच्ची मिट्टी  से लीपा  घर
खुला खुला भीगा आँगन
घर्र घर्र करती घर की चक्की 
भूख जगाता सौंधा चूल्हा
बात कहाँ वो इन मकानों मे। 

आंधी के बाद का इंतज़ार वो
टूटे आमो की बौछार वो
झगड़ा करना फिर बटवारों पे
हर दिन इक नया किस्सा
बुनना उन बागानो मे।

बाल इतने छोटे क्यों
करती इतनी बदमाशी क्यों
मक्खन क्यों नहीं खाती हो
लड़को के संग क्यों जाती हो
प्यार झलकता था फिर भी 
बूढी ताई के उल्हानों मे,


पक्की महुया से अटी हुई 
वह पगडंडी आज भी
याद है मुझे
थाम कर हाथ तेरा बाबा
साथ थी चली खेत खलिहानो में।



Saturday, March 6, 2021

तेरा वो प्यार

वो जो तुम भाग रही हो
इधर उधर
तेरा वो प्यार इधर ही है,

नज़रे जो ढूंढ रही हर पल
तेरा वो दीदार इधर ही है,

तुम हो कर आहत ज़ब थक जाना
मेरे बहोपाश मे आ जाना
तेरे सब दर्द का मलहम मै
तेरा वो आधार इधर ही है,

स्वप्निल नयन जो देख रहे सपने
क्षण भर मे टूट गए कितने
तेरी खुली आँखों का मगर
स्वप्न साकार इधर ही है...