Sunday, March 28, 2021

होली

था हाथ मे उसके रंग प्यार का
वो स्याह रंग उड़ेल गया..।

वो मन की चौपड़ बिछाये बैठी रही
वो निर्मोही तन से खेल गया।

अब कासे डर पीर का
जब पीर बिछोह का
मन झेल गया।

3 comments: