क्या आज़ाद हैं हम ईर्ष्या से और निंदा से
क्या आज भी गर्व है ख़ुद पर
या फिर है शर्मिंदा से
क्या सच में हम आज़ाद है
क्या आज़ाद है हम या गुलाम से
नशे के या और किसी आदत के
है आलस से भरे हुए
या बंदे किसी काम के..
क्या सच मे हम आज़ाद है
क्या आज़ाद है हम पुरानी सोच के
वही ऊंच नींच, मे डूबे है
अंधी डगर पर चल रहै या जी रहें है होश मे
या जी रहें है होश मे
क्या सच मे हम आज़ाद है?
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