ना थीं हवा ना पानी वहाँ पर ,अजीब तन्हाई थीऔऱ वीरानी वहाँ पर ।
उस जिन्दगी मे भी थमी रही आस ,
और चलती रही रुक रुक कर साँस
कि तुम जरूर आयोगे ले के सुकून
बस एक यकीं और तेरा वो जुनून
न मरने दिया मुझे कभी भी
तुम आते जाते रहे ज़िंदगी मे
और आते रहोगे अभी भी
इस यकीं पर कायम रहूंगी
न थमी न रुकी बस चलती रहूँगी
कि गर सब कुछ भी हो जाये ख़त्म जहाँ मे
तो भी हम रहेंगे तेरी पनाह मॆ ।
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