हर शक्स मुस्कराता हैं देखके
हर शक्स दिखाता हैं खुशी अपनी
सौ गम दफनाए सीने में दिखते मशरूफ सब लोग हैं
दुनिया जैसी दिखती हैं वैसी होती नहीं यारों ..
सुबह मशरूफीयत तले अपने सपने छुपाये
निकल जाते हैं काम पर
जैसे अचानक किसी मेहमान के आने पर
कपड़े बेतरतीब अलमारी में ठूंस दिये हो
पर अरमानों का बोझ ;सपनों की पोटली
फ़िर से कचोटगी मन को
यूँ तो जिंदगी हार कर इतनी जल्दी रोती नहीं यारों ....
कोशिश कर सुन दिल की आवाज को
कामयाबी वो नहीं जो मुआशरा तय करें
सुकून उसमें हैं जो तेरी रूह कहे
सीकालत रख परे और तराश अपने हीरे को
इतनी आसानी से तकदीर रौनक खोती नहीं यारों ...
Copyrights reserved @Babita yadav 2018
Sunday, June 3, 2018
सुन दिल की आवाज
Subscribe to:
Post Comments (Atom)
No comments:
Post a Comment