Sunday, June 3, 2018

सुन दिल की आवाज

हर शक्स मुस्कराता हैं देखके
हर शक्स दिखाता हैं खुशी अपनी
सौ गम दफनाए सीने में दिखते मशरूफ सब लोग हैं
दुनिया जैसी दिखती हैं वैसी होती नहीं  यारों ..
सुबह मशरूफीयत तले अपने सपने छुपाये
निकल जाते हैं काम पर
जैसे अचानक किसी मेहमान के आने पर
कपड़े बेतरतीब अलमारी में ठूंस दिये हो
पर अरमानों का बोझ ;सपनों की पोटली
फ़िर से कचोटगी मन को
यूँ तो जिंदगी हार कर इतनी जल्दी रोती नहीं यारों ....
कोशिश कर सुन दिल की आवाज को
कामयाबी वो नहीं जो मुआशरा तय करें
सुकून उसमें हैं जो तेरी रूह कहे
सीकालत रख परे और तराश अपने हीरे को
इतनी आसानी से तकदीर रौनक खोती नहीं यारों ...
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