रोम रोम अपना मैं तेरे से भर लूं
थोड़ा रुको तुमको जरा और प्यार कर लूं
पूरी जिंदगी की चाहतों को हैं जीनें का मन
तुमको देख देख पेहले अपनी आँखें तर लूं
कैसे हो ?क्यूं हो? किसके हो ?
नहीं जानती
बस इतना पता हैं नायाब हैं
तेरा होना आज़ मेरे नज़दीक
तों क्यूँ न मैं थोड़ा इस आज़ में ठहर लूं
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