तेरी ख़ामोशी मुझे सताने लगे तो मेरी बेचैनियाँ कुछ बताने लगे तों तेरे पैग़ाम और कम आने लगे तों भटकती सोच मेरी तेरे दर पर ठीकाने लगे तो समझ लें na तुम अगर हम नज़रे चुराने लगे तों
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