हर दिये को दिखाने को इक सुरज होगा
हर वक्त पुराना होगा कभी
औऱ हर बीती याद भूलानी होगी
हर बारिश की उम्मीद में
हर धूप की तपिश सहनी होगी
हर दरख़्त की हरी शाख पर पतझड़ होगा
हर रौनक ए महल में कभी वीरानी होगी
हर पन्ने पर कई किस्से होंगे
धीरे धीरे फ़िर तेरी कहानी होगी
तू बन सकेगा समंदर या नही
बड़ी बात होगी जो
ज़िन्दगी तेरी दरिया क़ा पानी होगी .
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