मेरे हमराज़ ,मेरे हमनवां ,
मेरी काबलियत ,मेरी नादानिया ,
मेरी रुस्वाइयाँ ,मेरी खामियाँ,
कोई बात नही ,जो तुझे बयां ना की ...
मेरी हसरतें ,मेरी इज़तिराब ,
मेरी ख़ुदगरज़ियां ,मेरी आज़ार ,
कुछ भी नही तुझसे हो पिनाह,
तेरे समने कभी हया ना की ...
मेरी रूह भी है शिकस्ता अब ,
तू कौन ऐसा है मेहरम,
तू रख दे हाथ मेरे ज़ख़्म पर ,
जो तेरे होते कभी कोई दवा ना की ..
इज़तिराब -restlessness
आज़ार -suffering
पिनाह-hidden
शिकस्ता -broken
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