Friday, September 25, 2020

वज़ह

कोई वज़ह तो रही होगी
जो साथ रहा तेरा कुछ देर।

सवाल कोई ऐसा नहीं
जिसका ज़वाब न हो
सो सवाल ये ज़हन को मेरे
कुरेदता रहा कुछ देर।

आंखो से ओझल होने तलक
तेरे मुड़ कर आने की उम्मीद तलक
उसी दर पे मै रुका रहा कुछ देर।

तू इस क़दर नाराज़ था
या कुछ और ही मिजाज़ था
सुना था मिजाज़ बदलते भी है
तो 
मिजाज़ बदलने का इंतज़ार भी
 मै
करता रहा कुछ देर।

कोई वज़ह तो रही होगी
जो साथ रहा तेरा कुछ देर




Sunday, September 20, 2020

बाकी है तुम्हारे साथ

कुछ और बंधन 
कर्मो के 
बाकी है तुम्हारे साथ।
किलस गया है अंतर्मन
जल गया है अंदर सब
पर शायद राख़ जलनी
बाकी है तुम्हारे साथ।
माया है,मोह है बस
सब जान चुकी हूं
कोई गहरा ज्ञान जानना
बाकी है तुम्हारे साथ।
बरसों का चक्र
थका चुका है मुझे
मन भी मेरा नहीं
तन भी मेरा नहीं
तो क्या 
बाकी है तुम्हारे साथ।
कुछ और बंधन 
कर्मो के 
बाकी है तुम्हारे साथ।

Tuesday, September 1, 2020

मॉनसून

इस बार सिर्फ हाथ लगा इंतज़ार
तुम आयी तो कई बार
पर जैसे मेहमान हो जल्दी में कोई
बरसी और चली गई 
न सुकून से एक कप चाय पी
न ही बाते हुई दो चार।

तुम नहीं जान सकी
मै उदास था कुछ इस कदर
अपनों से दूर था
न इस बार कोई फितूर था
हां खाली काफ़ी हद्द तक जरूर था
सोचा था तुम अयोगी
संग वक़्त कुछ बितायोगी 
पर,
शायद तुम भी थी लाचार।

अभी भी घड़ियां बची है
तुम्हारे लिए एक आध,
कविताएं भी रची है
रूठ कर तुम यूं जायो न
मुझे आस है आज भी तेरी
बरस जा मेरे आंगन में
दिल गाता है मल्हार