Friday, September 25, 2020

वज़ह

कोई वज़ह तो रही होगी
जो साथ रहा तेरा कुछ देर।

सवाल कोई ऐसा नहीं
जिसका ज़वाब न हो
सो सवाल ये ज़हन को मेरे
कुरेदता रहा कुछ देर।

आंखो से ओझल होने तलक
तेरे मुड़ कर आने की उम्मीद तलक
उसी दर पे मै रुका रहा कुछ देर।

तू इस क़दर नाराज़ था
या कुछ और ही मिजाज़ था
सुना था मिजाज़ बदलते भी है
तो 
मिजाज़ बदलने का इंतज़ार भी
 मै
करता रहा कुछ देर।

कोई वज़ह तो रही होगी
जो साथ रहा तेरा कुछ देर




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