कर्मो के
बाकी है तुम्हारे साथ।
किलस गया है अंतर्मन
जल गया है अंदर सब
पर शायद राख़ जलनी
बाकी है तुम्हारे साथ।
माया है,मोह है बस
सब जान चुकी हूं
कोई गहरा ज्ञान जानना
बाकी है तुम्हारे साथ।
बरसों का चक्र
थका चुका है मुझे
मन भी मेरा नहीं
तन भी मेरा नहीं
तो क्या
बाकी है तुम्हारे साथ।
कुछ और बंधन
कर्मो के
बाकी है तुम्हारे साथ।
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