अपना एक दोस्त ख़ास था जो...
अब सभी का सा लगता है.
जिँदँगी की मश्रू फियत के बादलों मे..
मोहब्बत का चाँद अब फीका सा लगता है ।
कहने को कोलाहल है...चारों ओर ,और हैं रँगीनिया ,
पर अचानक सब क्यू झूठा सा लगता है ।
खुशनुमा साथ था कुछ दिनो का ऐ दोस्त ,
पर अब तू कुछ रुठा सा लगता है।
kya bat hai...!!!
ReplyDeleteshukriya
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