आज़ एक ख्याल रह रह कर आया है ,
सिर्फ ज़िन्दगी में प्यार कमाया है..
पता नही क्यूँ मतलबी ना हो पाये ,
दुनियावाले दुनियादारी ना सिखा पाए,
"कुछ पाने के लिए" न कुछ कर पाये,
आंसू छलक गयें बीती यादो के लिए ,
ख़ुद को आज़ काफ़ी खाली पाया है ,
पर सिर्फ ज़िन्दगी में प्यार कमाया है ...
कभी बिना कारण किसी के हंसी बने ,
कभी कभी अपनो से मात भी खायी ,
पर "जीतने के लिए" कभी खेलना ना आया है,
आज़ ख़ुद को फिर अकेला पाया है ,
आज़ फिर ख्याल रह रह कर आया है ,
कि ज़िन्दगी में सिर्फ़ प्यार कमाया है...
क्या सोच कर आँखे है नम ?
क्या खुशियों के आगे ग़म पड़ गयें कम?
आज़ फ़िर मुस्कराहट सी है गयी तर,
आज़ फ़िर डूबा गया बीती बातों का भंवर ,
सब फ़िर रह रह कर याद आया है,
क्या करे ज़िंदगी में सिर्फ़ प्यार कमाया है ...
ख़ुद को बहुत अमीर सा महसूस हो रहा है,
दिल भी गद गद हो रहा है,
सरोबार सा क्यूँ इतना रो रहा है ,
सब लुट गया फ़िर भी शुक्रगुज़ार हो रहा है ,
आज़ एक ख्याल रह रह कर आया है ,
सिर्फ ज़िन्दगी में प्यार कमाया है ...
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Saturday, January 5, 2019
प्यार कमाया है
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