अब किसीका इन्तेजार नही है ,
ये अहसास भी ख़ुद में कितना सही है ..
पेहले लगता था कोई मेरे लिए भी कहीँ है ,
अब मैं ख़ुद में ही पूर्ण हूँ ,
औऱ शायद सच भी यही है ,
कि अब किसीका इन्तेजार नही है ..
आज़ भी वक्त पेहले ही है जैसा ,
मेरे हालात, मेरे जज्बात ,वही है
कोई दस्तक है देता तो भी मौन ही रहता है मन ,
पर अब, मन की आवाज़ सुनाई दे रही है ,
हाँ अब किसीका इन्तेजार नही है ,
औऱ ये अहसास भी अपने में कितना सही है ...
कितना वीराना सा लगता था सब कुछ ,
अब वीराना में लगता है सब कुछ,
औऱ जब सब कुछ पा ही लिया है ,
किसी से कोई तवक्कौ नही है ,
अब किसीका इन्तेजार नही है ,
ये अहसास सच में कितना सही है ..
तवक्कौ- expectation /hope
Copyrights@Babita Yadav2019
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