Wednesday, February 27, 2019

तरसते रहे 14 feb

हम एक बूँद को तरसते रहे
तुम बंजरो पर बरसते रहे ....
हम एक बूँद को तरसते रहे
तुम बंजरो पर बरसते रहे ....

दूर इतनी दूरियां थी
फ़िर भी थक कर भी हम चलते रहे
तू छिप बैठा किसी कि ओट में ..
तेरे दीदार को हम मचलते रहे ..

तू गया बुझा कुछ इस कदर ,
तू बुझा गया कुछ इस कदर ,
तेरी याद -ए -तपिश में सुलगते रहे ,
और तमाम उम्र इस रोष में ,
आग हम उगलते रहे ...

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