हम एक बूँद को तरसते रहे
तुम बंजरो पर बरसते रहे ....
हम एक बूँद को तरसते रहे
तुम बंजरो पर बरसते रहे ....
दूर इतनी दूरियां थी
फ़िर भी थक कर भी हम चलते रहे
तू छिप बैठा किसी कि ओट में ..
तेरे दीदार को हम मचलते रहे ..
तू गया बुझा कुछ इस कदर ,
तू बुझा गया कुछ इस कदर ,
तेरी याद -ए -तपिश में सुलगते रहे ,
और तमाम उम्र इस रोष में ,
आग हम उगलते रहे ...
No comments:
Post a Comment