मैं रुक गया इंतजार में बैठ गया तेरी राह में देख सका ना की कहीँ ख़ुश दिली का मंज़र भी है ..
हर दर को तेरी दरगाह समझ सर झुका कर सजदा कीया ख़ुद को प्यास से मरता पाया तो पता चला मेरे अन्दर इक समन्दर भी है ...
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