आज़ जला रही हूँ सब
कमरें में रखी फ़ालतू पुरानी चीजे
कुछ उलझी तारे ईअर फ़ोन की
कुछ रंग बदलने वाले कार्ड
कुछ कभी कभी काम आनें वाली छतरियां
कुछ सुनहले दिखने वाले गले हुए फ़ूल
कुछ मीठी पुरानी गोलिया
कुछ यादों में लिपटी तस्वीरे
कपड़े जो अब घिस चूके है
और आँसूओं से बेरंग हुऐ रूमाल
एक नींद ना आने पर लिपट कर सोने के लिए सॉफ्ट टॉय
कुछ कई बार जोडें गए चार्जर
कुछ फलसफो की किताबे
जो कभी कारगर ना हुई
एक पुरानी फोन डायरी
और वक्त बेवक्त काम आनें वाली ढेरो चीज़े
सुलगा के सब राख हो जायँगे
जो बचेगा इस अग्नि परीक्षा से
उसे मैं रख लूंगी वापस .....सदा के लिए
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