मायावी हैं सब ,
किस क़दर दिखावटी हैं ये संसार ,
जूनून ,सपनें, इच्छाए ,संघर्ष, अनुभव हैं,
मायावी है सब ,
सोच बैठा, मै जीता गया हूँ ,
पा लिया जो तुमको ,
आज़ हो ,कल नही रहोगे,
जो पहलू मे हो अब,
मायावी है सब
आया हूँ बस जीने क़ो,
धूप ,छाव, एक सिक्के के पहलु ,
आज़ रात गहन लगे बहुत है ,
भोर होगी रे कब ,
मायावी है सब ,
एक शून्य से दूजे शून्य तक,
समय मिला है साँसों मे बंध कर ,
सफ़र अनूठा ,मै एक मुसाफ़िर,
गन्तव्य देख निकल जायूंगा
सामान बटोरा,
छोड़ना होगा तब ,
मायावी है सब
मायावी है सब
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