शायद अपने हिस्से से ज्यादा था मांगा , पर इतनी शिद्दत से मांगा, कि ख़ुदा भी शर्मसार हो , किश्तों मे देता रहा ..
जानता था वो मेरे अपनो के दिए दर्द को, कड़वाहट की जरूरत है, पर मैं बरदाश्त कर सकूं , थोडी़ थोडी सी मिठास रिश्तों मे देता रहा ....
No comments:
Post a Comment