सबको अपने दिल का,
इक छोटा सा कोना ,
गुलज़ार करना पड़ता है कभी ...
कब तक पत्थर के मकान मे
दम तोडोगे ,
हाँ महफ़ूज़ हो वहाँ ,
पर जिंदा नहीं ;
कभी आबाद ,
कभी बरबाद होगा गुलज़ार,
माना होगे रंग वो ख़ुशबू भी,
पर चमन को ज़ार ज़ार करना
पड़ता है कभी ...
ख़ौफ़ ए दर्द से छिपे रहना,
अलग बात है ,
ख़्वाब देखना ,ख्वाब क़ो जीना ,
अलग बात है ,
अलसाई सी दीवानगी क़ो जगा ,
दिल की राहतों कें लिऐ ,
ख़ुद क़ो बेदार भी करना पडता हैं कभी ....
बेदार =wakeful
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