जल जल के बुझी हैं कई बार सनम , अरसो से ,बरसो तक सुलगी हैं , इतनी हवा ना दो ,राखे -ए -मोहब्बत क़ो , ये कहीं आग बन जाएगी ...
बड़ी मुश्किल से दबा रखी हैं दिल में, जज्बातों की लहर, तुम इतना प्यार लुटाते रहोगे तों , सैलाब, ये बेहिसाब बन जाएगी ...
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