Sunday, February 2, 2020

ए ज़िन्दगी

ए ज़िंदगी ,थोड़ा उधार दे ना
चुका दूंगा किश्तों में
कोई खुशी खो कर
कुछ पहर रो कर

ए ज़िंदगी थोड़ा अहसान कर ना
चुका दूंगा वो भी
कुछ अपनों की बेवफ़ाई से
कुछ यारो की रुसवाई से

ए ज़िन्दगी थोड़ी दे मोहलत
कि अभी सिर्फ
"जी ना "नहीं,जीना है
कि अभी तू कुछ समझ आई है
और  तुझे घूंट घूंट पीना है

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