Saturday, February 1, 2020

आग ए गिरया open mic 1

बहुत आग- ए -गिरया (दुख) मे जला हूँ मै 
पर क्या ढीट की बला हूँ मै 
आशिकी की या इबादत 
की ख़ुदा भी नाराज़ था ...
तू बन गया था सुबह शाम सा 
सब कामो से बड़ा काम था 
मै ना बन सका तेरी तरज़ीह (pradhantha)
ना तेरे पास इस क़ा 
ज़वाज़ था .....
अब ना होश है 
ना ही रोष है 
अब बची सिर्फ अक़ीदत samman
ना था इल्म ना बसीरत insight कि 
ये एक फिरदौस क़ा आगाज़ था ...


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