Thursday, October 28, 2021

I am.enough for myself

You were never there, my dear,
You were never there 
When I had aches n pain,
My desolate heart cried in vain,
I held my head high and made a stride ,
Felt like, I am enough for myself .

While I sank in abyss so dark,
Dreaded by journey i couldn't embark ,
But then I slept tucking my pillow,
Onto my bosom,
Tears drowning my mute companion .,
I realized, I am enough for myself.

When was exhausted bearing it all,
Thought you would hold me before I fall,
But yes,I fell and got upright on my own,
There wasn't time even to mourn, 
Guess I am enough for myself, 
No,I am sure I am enough for myself. 

Friday, October 1, 2021

The new me

The new me
Is fearless 
Freer
Unbiased 
The new me
Is honed
Clear 
Unshackled 
The new me
Is all love
Gracious 
Almost Goddess

Sunday, August 29, 2021

जंगली ज़हरीले फ़ूल

बेज़ान बंजर जगह पर कभी कोई फ़ूल देखो
तो मन मोह लेगा
वो जामुनिया फ़ूल
ख़ुशबू से सरोबार
खींच लेगा अपनी ओर
क्यूंकि वहाँ फ़ूल होने की संभावना
ही नहीं थी
चले जाना क़रीब थोड़ा
बारीकीयों को नज़दीक से ज़रा देखना
शायद ज़्यादा मन करें तो
भीनी ख़ुशबू भी लेना
पर गलती से भी तोड़ न लेना
बालों में लगाने के लिए
या किताबों में रखने के लिए
सुना है जंगली फ़ूल बहुत ज़हरीले होते है
बचना मुश्किल है उनसे.

Sunday, March 28, 2021

होली

था हाथ मे उसके रंग प्यार का
वो स्याह रंग उड़ेल गया..।

वो मन की चौपड़ बिछाये बैठी रही
वो निर्मोही तन से खेल गया।

अब कासे डर पीर का
जब पीर बिछोह का
मन झेल गया।

Thursday, March 11, 2021

गांव

पक्की महुया से अटी हुई 
वह पगडंडी आज भी
याद है मुझे
थाम कर हाथ तेरा बाबा
साथ थी चली खेत खलिहानो में। 

ढेरों बातें,चिलबिल का पेड़
पोखर के ठंडे पानी मे डूबे रहना
चरमर खटिया पर फिर
थक कर सो जाना
मीठे सपने बांध सरहानों मे। 

कच्ची मिट्टी  से लीपा  घर
खुला खुला भीगा आँगन
घर्र घर्र करती घर की चक्की 
भूख जगाता सौंधा चूल्हा
बात कहाँ वो इन मकानों मे। 

आंधी के बाद का इंतज़ार वो
टूटे आमो की बौछार वो
झगड़ा करना फिर बटवारों पे
हर दिन इक नया किस्सा
बुनना उन बागानो मे।

बाल इतने छोटे क्यों
करती इतनी बदमाशी क्यों
मक्खन क्यों नहीं खाती हो
लड़को के संग क्यों जाती हो
प्यार झलकता था फिर भी 
बूढी ताई के उल्हानों मे,


पक्की महुया से अटी हुई 
वह पगडंडी आज भी
याद है मुझे
थाम कर हाथ तेरा बाबा
साथ थी चली खेत खलिहानो में।



Saturday, March 6, 2021

तेरा वो प्यार

वो जो तुम भाग रही हो
इधर उधर
तेरा वो प्यार इधर ही है,

नज़रे जो ढूंढ रही हर पल
तेरा वो दीदार इधर ही है,

तुम हो कर आहत ज़ब थक जाना
मेरे बहोपाश मे आ जाना
तेरे सब दर्द का मलहम मै
तेरा वो आधार इधर ही है,

स्वप्निल नयन जो देख रहे सपने
क्षण भर मे टूट गए कितने
तेरी खुली आँखों का मगर
स्वप्न साकार इधर ही है...

Friday, February 12, 2021

फलसफा14 feb😍

कहते है आज मोहबत का दिन है
कहते है आज मोहबत का दिन है
लोग बाग़ मिलेंगें मोह्बत जताते हुए

और हम
और हम
किसी महफ़िल मे
ना मज़ूद् इश्क़ कि
शायरी सुनात हुए।

कहते है आज मोहबत का दिन है
कहते है आज मोहबत का दिन है
लोग बाग़ मिलेंगें मोह्बत जताते हुए

और हम
और हम
मिलेंगे कहीं
खुद को असल मोहबत का
फलसफा समझाते हुए।

Friday, January 15, 2021

love that look

I love that look 
In lover's eyes
Adorning unfulfilled promises 
That makes them look like eternal fools 
Same time, make them look extremely 
Vulnerable and beautiful  too.
That shine gleaming in eyes
Whenever they fondly remember 
Their beloved
Love lost..for sure.
An assurance that they lived the moment 
No one else could feel as much
Or that divinity  they felt while they lived it....