Tuesday, December 4, 2018

शब

शब बीतती गयी  इज्तीरार में ,
आरज़ू अश्क से बहती रही ...

तेरी हर बात का है असर इस कद्र ,
जो बेचैनी मेरी कहतीं गयी ..

तू अनजान मेरी परेशानी से है ,
मशगूल है, मसरूफ़ है, या मग्र्रूर है 
मेरी मोहबत तेरी गफ्लते सहती रही ...

तू यक़ीन कर मेरी बात का ,
मेरी चाहते मुखतालिक है तेरी चाहतों से ,और
तेरे मेरे दरमियाँ की कुरबते  ढहती रही ....

इज्तीरार ..बेचैनियाँ
गफ़लत ...नज़र अंदाज़
मुखतालिक...different
कुर्बतें ...करीबिया

No comments:

Post a Comment