शब बीतती गयी इज्तीरार में ,
आरज़ू अश्क से बहती रही ...
तेरी हर बात का है असर इस कद्र ,
जो बेचैनी मेरी कहतीं गयी ..
तू अनजान मेरी परेशानी से है ,
मशगूल है, मसरूफ़ है, या मग्र्रूर है
मेरी मोहबत तेरी गफ्लते सहती रही ...
तू यक़ीन कर मेरी बात का ,
मेरी चाहते मुखतालिक है तेरी चाहतों से ,और
तेरे मेरे दरमियाँ की कुरबते ढहती रही ....
इज्तीरार ..बेचैनियाँ
गफ़लत ...नज़र अंदाज़
मुखतालिक...different
कुर्बतें ...करीबिया
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